RSS को यूं चुनौती देने की तैयारी में कांग्रेस

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Congress ready to challenge RSS

नई दिल्ली संघ और बीजेपी को रोकने के लिए एक तरफ जहां कांग्रेस तमाम विपक्षी दलों के साथ मिलकर एक मजबूत मंच तैयार करने में जुटी है, वहीं अपने फ्रंटल संगठन सेवा दल के जरिए जमीनी स्तर पर भी लड़ाई तेज कर रही है। सेवा दल द्वारा देशभर में 1000 जगहों पर ‘ध्वज वंदन’ की योजना को संघ के राष्ट्रवाद को चुनौती देने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है। जिस तरह से संघ ने देश में राष्ट्रीयता और राष्ट्रवाद आक्रामक बहस शुरू की है, उसी की काट के तौर पर कांग्रेस ‘ध्वज वंदन’ कार्यक्रम लेकर आई है।

  • संघ की तरह ही सेवा दल भी एक काडर पर आधारित संगठन है। कांग्रेस के एक सीनियर नेता का कहना है, ‘सेवा दल का ध्वजवंदन कोई नई चीज नहीं है। हमारे यहां हमेशा से यह होता रहा है। महीने में एक बार रविवार सेवादल के हर केंद्र पर यह होता रहा है।’ हालांकि सचाई यह है कि पिछले कुछ अर्से से सेवादल की सक्रियता और गतिविधियां कम रही हैं।
  • हाल ही में सेवा दल की दो दिन की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक दिल्ली में हुई। इसमें बाकायदा सेवा दल के लिए एक रोडमैप तैयार किया गया। लोकसभा चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस ने अपने सेवा दल कर्मियों के जरिए देश के दूरदराज इलाकों में पैठ बनाने की तैयारी की है। सेवा दल की योजना है कि आने वाले दिनों में वह बूथ स्तर पर जहां एक ओर तिरंगे की अहमियत बताएगा, वहीं दूसरी ओर संघ के भगवा झंडे और बीजेपी के दोरंगे झंडे (हरा-केसरिया) पर हमला भी बोलेगा।
  • सूत्रों के अनुसार, सेवादल आने वाले समय में देश के अलग-अलग वर्गों और तबकों के बीच जाकर राष्ट्रवाद व देश प्रेम पर चर्चा और बहस कराएगा। संगठन के एक आला पदाधिकारी का कहना था कि इसके लिए सेवादल देश की यूनिवर्सिटीज, कॉलेजों और समाज के अन्य तबकों के बीच जाकर राष्ट्रवाद और देशभक्ति के बारे में गांधी और नेहरू के विचारों का प्रचार करेगा। उन्होंने कहा कि इन कार्यक्रम के जरिए सेवादल का टारेगट संघ के उग्रराष्ट्रवाद और फासीवादी विचारों की पोल खोलना भी है।

उनके हाथ में डंडा, हमारे हाथ में झंडा

सेवा दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालजी देसाई हालांकि यह मानने को तैयार नहीं है कि उनका ध्वजवंदन कार्यक्रम संघ के ध्वजवंदन का जवाब है। देसाई का कहना है कि संघ की शाखाओं में तिरंगा नहीं फहराया जाता, वहां केसरिया ध्वज के नीचे शाखाएं लगती हैं। देसाई बताते हैं कि संघ मुख्यालय में 2002 तक कभी तिरंगा नहीं फहराया गया। देसाई संघ पर कटाक्ष करते हुए कहते हैं कि उनके हाथ में डंडा, जबकि हमारे हाथ में झंडा रहता है। डंडा बाहुबल का प्रतीक है तो झंडा सत्य, अहिंसा, एकता, अखंडता व समानता का प्रतीक है।

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