अभी इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने का दौर है। इंटरनेट पर धोखे से शिकार करनेवाले भी इस मौके को भुनाने में जुटे हैं। टैक्सपेयर्स को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के मेल से मिलती-जुलती आईडी से मेल आ रहे हैं , जिसमें कहा जा रहा है कि ‘रिफंड अमाउंट पाने के लिए’ अपने नेटबैंकिंग डीटेल्स दें। धोखाधड़ी करनेवालों की ओर से जो मेल आ रहे हैं, उनकी आईडी है- [email protected] जबकि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की आईडी [email protected] है।

फर्जी मेल आईडी और सही सरकारी आईडी में दो अंतर हैं। पहला यह कि फर्जी मेल में सिर्फ फाइलिंग (filling) है जबकि सही सरकारी मेल आईडी में फाइलिंग से पहले ई (efliling) है। दूसरा अंतर फाइलिंग की स्पेलिंग को लेकर है। फर्जी मेल आईडी में (filling) में डबल एल (ll) है जबकि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की मेल आईडी में फाइलिंग (filing) की सही स्पेलिंग यानी सिंगल एल (l) है।

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के प्रवक्ता ने बुधवार को टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा, ‘हम अपनी वेबसाइट पर चेतावनियां जारी करते रहते हैं। साथ ही हम टैक्सपेयर्स को टेक्स्ट मेसेज भेजकर भी ऑनलाइन फ्रॉड के बारे में सचेत करते रहते हैं। सबसे बढ़िया तो यह है कि इस तरह के संदिग्ध मेल का जवाब नहीं दें और न ही बैंक अकाउंट या क्रेडिट कार्ड डीटेल्स शेयर करें क्योंकि हम इनकी मांग नहीं करते।’

हालांकि, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की वेबसाइट पर तो कोई चेतावनी नहीं मिली, लेकिन चार्टर्ड अकाउंटैंट्स (CA) और टैक्स रिटर्न तैयार करनेवालों (TRP) ने वॉट्सऐप पर चेतावनी जरूर जारी की है। वॉट्सऐप मेसेज में लिखा गया है, ‘जिन लोगों को रिटर्न फाइल करने के बाद टैक्स की गणना में गलती और रिफंड अमाउंट भेजने को लेकर मेल मिल रहे हैं, उनके लिए एक महत्वपूर्ण जानकारी- कृपया ऐसे मेल को नजरअंदाज करें। ये मेल हैकर्स भेज रहे हैं। इस मेल पर क्लिक करते ही सीधा नेटबैंकिंग पेज खुल जाएगा और आपने जैसे ही अपना नेटबैंकिंग साइट लॉग इन किया, आपका बैंक अकाउंट हैक हो जाएगा। ध्यान रखिए, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट आपको मिलनेवाले रिफंड की जानकारी प्रॉपर नोटिस भेजकर देगा।’

मुंबई की रहनेवाली सुषमा बांडेलकर टैक्स रिटर्न तैयार करती हैं। उन्होंने कहा, ‘चूंकि रिटर्न फाइल करने की डेडलाइन 31 जुलाई नजदीक आते-आते इस तरह के फर्जीवाड़े बढ़ेंगे। करदाताओं को फोन या मेल पर अपनी व्यक्तिगत जानकारियां साझा नहीं करनी चाहिए, भले सामनेवाला खुद को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से होने के कितने भी दावे करे। अगर रिफंड मिलना होगा तो आपको आई-टी डिपार्टमेंट की ओर से फॉर्मल नोटिस मिलेगा। अपने बैंक डीटेल्स, लॉग इन का नाम या यूजर आईडी, क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड डीटेल्स अथवा पिन नंबर किसी भी अनजान व्यक्ति अथवा वेबसाइट को नहीं दें।’

बांडेलकर ने बताया कि पहले भी आई-टी रिटर्न्स की आड़ लेकर फर्जीवाड़े को अंजाम दिया जा चुका है। उन्होंने कहा, ‘अगर कोई बदलाव है तो रेक्टिफिकेशन फॉर्म जरूर फाइल करना चाहिए ताकि आपको रिफंड मिल सके। सभी सीए और टीआरपी करदाता का बैंक अकाउंट नंबर और आईएफएससी कोड टैक्स फाइलिंग फॉर्म में देते ही हैं क्योंकि रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया तभी पूरी होती है। इसलिए, डिपार्टमेंट की ओर से इनकी दोबारा मांग करने का कोई सवाल नहीं उठता है।’

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