उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के पुराने सरकारी बंगले के विवाद में नया मोड़ आ गया है. बंगले में तोड़फोड़ के आरोपों को खारिज करते हुए समाजवादी पार्टी ने उलटा इसके लिए योगी सरकार को जिम्मेदार ठहरा दिया और पूरे प्रकरण को पूर्व सीएम को बदनाम करने की साजिश बताया है. उधर तहस-नहस बंगले की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गई हैं. आरोप लग रहे हैं कि क्या अखिलेश यादव ने सरकारी बंगले में अपनी विलासिता छुपाने के लिए ये तोड़फोड़ कराई. खुद योगी सरकार के मंत्री भी ये आरोप लगा रहे हैं.

  • सवाल ये है कि आखिर सरकारी बंगले में ऐसी कौन सी चीजें लगी थीं जिन्हें अखिलेश यादव बंगला खाली करते समय या तो अपने साथ ले गए या तहस-नहस करवा गए. बंगले में छत से लेकर फर्श और बैडमिंटन कोर्ट तक उखड़ा पड़ा है. फर्श से टाइल्स उखड़ी हुई हैं, फ्लोर कारपेट को फर्श से निकलवाया दिया गया है, स्विच समेत बिजली की वायरिंग तक निकाल ली गईं हैं. हर कमरे में तोड़फोड़ हुई. एसी से लेकर स्विच बोर्ड तक गायब थे.
  • अखिलेश यादव पर सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि उनसे पहले सुप्रीम कोर्ट के ही आदेश पर पूर्व मुख्यमंत्री और राजस्थान के गवर्नर कल्याण सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री मायावती, केंद्रीय गृहमंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह ने भी सरकारी बंगलों को खाली किया, लेकिन ऐसा नजारा कहीं देखने को नहीं मिला.
  • उत्तर प्रदेश के परिवहन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि पहले सरकारी बंगले में महंगे सामान लगाए गए, सौ-सौ एसी, इटली की टाइल्स, फ्लोरिंग आदि लगाई गई और जब बंगला खाली करने की नौबत आई तो सबकुछ छुपाने के लिए लिए ये तोड़फोड़ की गई.
  • स्वतंत्र देव सिंह ने कहा, ‘ये लोग आलीशान जीवन जीते थे और अपना आवास इसी प्रकार बनाते थे. इन्होंने गरीबों के खून पसीने की कमाई को लूटकर अपने-अपने बंगले में 100 करोड़ रुपये लगाए हैं. आप राजनाथ सिंह का बंगला देखिये, कल्याण सिंह बंगला देखिये वहां ये सब नहीं लगा है. 100-100 एसी लगवाना, इटली का टाइल्स लगवाना, क्या मतलब है इसका?’
  • हालांकि समाजवादी पार्टी का कहना इसके बिल्कुल उलट है. पार्टी ने कहा है कि ये अखिलेश यादव को बदनाम करने की साजिश है. ये तोड़फोड़ अखिलेश के बंगला खाली करने और उसकी चाबी अफसरों को सौंपने के बाद हुई है.

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