कैसे बना कश्मीर और कैसे पड़ा इसका यह नाम?

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Kashmir History

कश्मीर को धरती का स्वर्ग कहा जाता है. यहां की वादियां, खूबसूरत पहाड़ और झीलों के खूबसूरत नजारे लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर ही लेते हैं. दुनियाभर से लोग यहां खिंचे चले आते हैं. लव बर्ड के लिए तो जैसे रोमांस के लिए इससे अच्छी जगह कहीं और हो ही नहीं सकती है. लेकिन यहां आने वाले बहुत ही कम लोगों को कश्मीर के इतिहास के बारे में पता होगा. कश्मीर के बनने के पीछे वैसे तो कई कहानियां सुनने को मिलती हैं,

लेकिन पुराणों में ऋषि कश्यप का जिक्र कश्मीर के निर्माण के लिए उल्लेखित है. उनके साथ-साथ भगवान शिव की पत्नी देवी सती का नाम भी पुराणों में लिया गया है. तो आइए जानते हैं कैसे हुआ कश्मीर का जन्म और कैसे पड़ा इसका ये नाम. प्राचीनकाल में कश्मीर हिन्दू और बौद्ध संस्कृतियों का पालना रहा है. माना जाता है कि यहां पर भगवान शिव की पत्नी देवी सती रहा करती थीं और उस समय ये वादी पूरी पानी से ढकी हुई थी.

यहां एक राक्षस नाग भी रहता था, जिसे वैदिक ऋषि कश्यप और देवी सती ने मिलकर हरा दिया और ज्यादातर पानी वितस्ता जो आज झेलम नदी के नाम से जानी जाती है उसके रास्ते बहा दिया. इस तरह इस जगह का नाम सतीसर से कश्मीर पड़ा. इससे अधिक तर्कसंगत प्रसंग यह है कि इसका वास्तविक नाम कश्यपमर अथवा कछुओं की झील था. इसी से कश्मीर नाम निकला.

स्थानीय लोगों का विश्वास है कि इस विस्तृत घाटी के स्थान पर कभी मनोरम झील थी जिसके तट पर देवताओं का वास था. एक बार इस झील में ही एक असुर कहीं से आकर बस गया और वह देवताओं को सताने लगा. त्रस्त देवताओं ने ऋषि कश्यप से प्रार्थना की कि वह असुर का विनाश करें. देवताओं के आग्रह पर ऋषि ने उस झील को अपने तप के बल से रिक्त कर दिया.

इसके साथ ही उस असुर का अंत हो गया और उस स्थान पर घाटी बन गई. कश्यप ऋषि द्वारा असुर को मारने के कारण ही घाटी को कश्यप मार कहा जाने लगा. यही नाम समय के साथ-साथ बदल कर कश्मीर हो गया. निलमत पुराण में भी ऐसी ही एक कथा का उल्लेख है. कश्मीर के प्राचीन इतिहास और यहां के सौंदर्य का वर्णन कल्हण रचित राज तरंगिनी में बहुत सुंदर ढंग से किया गया है.

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